हमारा दृष्टिकोण

पत्रकारिता एक ऐसा शस्त्र है जिसे सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह समाज से इसकी बुराइयों का विनाश कर सकता है मगर गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर यह आत्मघाती भी हो सकता है। इस शस्त्र का इस्तेमाल समाज के हित में हो सके इसके लिये जरूरी है कि पत्रकार न सिर्फ प्रशिक्षित हों बल्कि सुसंस्कार, सकारात्मक सोच एवं सामाजिक सरोकारों से भी सज्जित हों। पत्रकारों के आन्तरिक विकास के लिये उन्हें ऐसा परिवेश मिलना जरूरी है जिसमें प्रबुद्ध जनों का संसर्ग और उच्चतम संस्कारों का निवास हो।